मुकुटबनच्या प्रियल पथाडे यांची कविता…..
मिलकर दिवाली मनाए
चलो चले हम सब मिलकर दिवाली मनाए…
किसान भाई को दुवॉ कराए…
शुरविर देश रक्षक को हौसला दिलाए…
गरीब बच्चे को खाना खिलाए…
आधार राशन के बिना भुखी है मेरी जनता…
ईस भारत देश मे अमीर के सिवा कोई गरीब को नही गिनता…
यहाँ कमवक्त भुखा वही सोता है जो दुसरो का पेट भरवाता…
सुखी वो होता है जो कमजोर से काम करवाता…
यहा दीया उस घर जलता जो पैसो सो दीया खरीदता है…
उसके घर मे अंधेरा जो वही दीया बनाता है…
न जाने कब मेरे किसान कि दिवाली आएगी…
न जाने कब सैनीको की टोली खुशीयो से घर आएगी…
मेरे सैनीक भाई जान गमाए जाता है…
यहॉ हमारी बहन को भाई का तोफा याद आता है…
जिंदगी मे जिंदे को डुबाया जाता है…
और मुर्दे को उठाया जाता है…
सच्चे प्यार की तलाश अक्सर यादे बन जाती है…
कोई भुला करते तो कोई बस, दुवॉ मे याद कर जाती है…
हमे तो अपनो कि रक्षा करना आता है…
कोई भरोसा रखता है तो कोई हमे छोड जाता है…
भुखा है वह भविष्य जो सडक वे सोता है…
फिकर है उसी को इसीलिए सडक के किनारो पौधा वह बोता है…
वही किसानो कि देन है जो हम खाते है…
फिर भी उसीको हम भुखे पेठ सुलाते है…
यहा देवि को सिक्युरीटी दि जाती है…
और लडकी की कुछ किमत नही…
शरम सा जिना वह जिती है…
दिया जलना तो उसका उपकार है…
देश रक्षा मे जान गमाए उसका सपना साकार है…
जिंदा हु तब तक फिकरत करूंगा…
खाली हात आया हु, खाली हात जाऊंगा…
हौसला रख बिना तेल का वो दिया भी जलेगा…
गरीब का भी घर रोशन सा खिलेगा…
उम्मीद कर वो खुशी का पल मिलेगा…
दुवॉ करूंगा तेरे घर मे हमेशा प्यार का फुल खिलेगा…
तु किसान पुरा जहा खिला…
तु भ्रष्टाचारी पुरा देश हिला…
तु सैनिक पुरी रक्षा कर…
तु हरामी गरीबो कि भक्षा कर…
तु इंसान इंसानियत दिखा…
तु लडकी अपने दम कि काबीलीयत दिखा…
तु हिम्मत रख वो जिंदगी मिले…
तु किस्मत रख वो प्यारा अजनबी मिले…
तु सबर कर वो खुशनसिबी मिले…
तु दिया जला वो रोशनी मिले…
तु प्यार जता आपस मे वो दोस्ती मिले…
दुसरो कि फिकर कर…
दर्द भरे कि मदत कर…
साथ देते, गिरते गिरते ही जिंदगी सिखना…
बस…
दुवॉ मे याद रखना
प्रियल पथाडे
(मुकूटबन १९-१०-२०१७)
वणी बहुगुणी या न्यूज पोर्टलसाठी आर्टिकल, कविता पाठवण्यासाठी, तसंच तुमच्यात असणा-या कलागुणांविषयी माहिती देण्यासाठी
संपर्क : निकेश: 9096133400
Email id: wanibahuguni.news@gmail.com